संत साहित्य
महाराष्ट्र के महान संतों के जीवनचरित्र, दिव्य अभंग और आध्यात्मिक संदेशों का संग्रह।
सुंदर ते ध्यान
👤 संत तुकाराम महाराज • 🏷️ abhang • 🕉️ Vitthal/Pandurang
सुंदर ते ध्यान उभे विटेवरी ।
कर कटीवरी ठेवोनिया ॥
तुळसीहार गळा कासे पीतांबर ।
आवडे निरंतर हेचि रूप ॥
मकर कुंडले तळपती कानी ।
कंठ कौस्तुभमणी विराजित ॥
तुका म्हणे माझे हेचि सर्व सुख ।
पाहीन श्रीमुख जोडोनी कर ॥
महाराष्ट्रातील थोर संत परंपरा
संत तुकाराम महाराज
संत तुकाराम महाराज महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के एक अत्यंत लोकप्रिय और महान संत-कवि थे. देहू में जन्मे तुकाराम जी के अभंग आज भी घर-घर में गाए जाते हैं.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत ज्ञानेश्वर महाराज
संत ज्ञानेश्वर महाराज वारकरी संप्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं. उन्होंने अल्पायु में ही भगवद्गीता पर प्रसिद्ध भाष्य "ज्ञानेश्वरी" मराठी में लिखा.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत एकनाथ महाराज
संत एकनाथ महाराज पैठण के रहने वाले भागवत संप्रदाय के महान संत थे. उन्होंने भारुडों और भजनों के माध्यम से समाज में समरसता फैलाई.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत नामदेव महाराज
संत नामदेव महाराज भक्त शिरोमणि और ज्ञानेश्वर जी के अनन्य सखा थे. उन्होंने उत्तर भारत का भ्रमण कर भक्ति का संदेश फैलाया. गुरु ग्रंथ साहिब में इनके ६१ पद संकलित हैं.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →समर्थ रामदास स्वामी
समर्थ रामदास स्वामी एक महान संत, तत्वज्ञानी और कवि थे. उन्होंने समाज में बल और भक्ति का संचार करने के लिए हनुमान मंदिरों की स्थापना की. वह शिवाजी महाराज के समकालीन थे.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत चोखामेळा
संत चोखामेळा १४वीं सदी के महान वारकरी संत थे. उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना करते हुए विठ्ठल भक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत मुक्ताबाई
संत मुक्ताबाई संत ज्ञानेश्वर की सबसे छोटी बहन थीं. वह अत्यंत विदुषी और आध्यात्मिक रूप से जाग्रत थीं. उनके "ताटीचे अभंग" विख्यात हैं.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत जनाबाई
संत जनाबाई संत नामदेव के घर दासी थीं. घरेलू काम करते हुए भी उनका मन सदैव विठ्ठल स्मरण में लीन रहता था.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत बहिणाबाई
संत बहिणाबाई संत तुकाराम की शिष्या थीं. उन्होंने पारिवारिक विरोधों के बावजूद अपनी भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया.
जीवन परिचय और साहित्य देखें →संत सोयराबाई
संत सोयराबाई १४वीं सदी की वारकरी संप्रदाय की संत-कवयित्री और संत चोखामेला की पत्नी थीं.
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