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संत साहित्य

महाराष्ट्र के महान संतों के जीवनचरित्र, दिव्य अभंग और आध्यात्मिक संदेशों का संग्रह।

महाराष्ट्रातील थोर संत परंपरा

संत तुकाराम महाराज

📍 जन्म: देहू, ... (१६०८) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत तुकाराम महाराज महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के एक अत्यंत लोकप्रिय और महान संत-कवि थे. देहू में जन्मे तुकाराम जी के अभंग आज भी घर-घर में गाए जाते हैं.

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संत ज्ञानेश्वर महाराज

📍 जन्म: आळंदी, महाराष्ट्र (१२७५) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत ज्ञानेश्वर महाराज वारकरी संप्रदाय के प्रवर्तक माने जाते हैं. उन्होंने अल्पायु में ही भगवद्गीता पर प्रसिद्ध भाष्य "ज्ञानेश्वरी" मराठी में लिखा.

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संत एकनाथ महाराज

📍 जन्म: पैठण, महाराष्ट्र (१५३३) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत एकनाथ महाराज पैठण के रहने वाले भागवत संप्रदाय के महान संत थे. उन्होंने भारुडों और भजनों के माध्यम से समाज में समरसता फैलाई.

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संत नामदेव महाराज

📍 जन्म: नरसी नामदेव, महाराष्ट्र (१२७०) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत नामदेव महाराज भक्त शिरोमणि और ज्ञानेश्वर जी के अनन्य सखा थे. उन्होंने उत्तर भारत का भ्रमण कर भक्ति का संदेश फैलाया. गुरु ग्रंथ साहिब में इनके ६१ पद संकलित हैं.

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समर्थ रामदास स्वामी

📍 जन्म: जांब, महाराष्ट्र (१६०८) 🕉️ आराध्य देव: Ram/Hanuman

समर्थ रामदास स्वामी एक महान संत, तत्वज्ञानी और कवि थे. उन्होंने समाज में बल और भक्ति का संचार करने के लिए हनुमान मंदिरों की स्थापना की. वह शिवाजी महाराज के समकालीन थे.

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संत चोखामेळा

📍 जन्म: मेहुणा राजा, महाराष्ट्र (१४वे शतक) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत चोखामेळा १४वीं सदी के महान वारकरी संत थे. उन्होंने जातिगत भेदभाव का सामना करते हुए विठ्ठल भक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया.

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संत मुक्ताबाई

📍 जन्म: आळंदी, महाराष्ट्र (१२७९) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत मुक्ताबाई संत ज्ञानेश्वर की सबसे छोटी बहन थीं. वह अत्यंत विदुषी और आध्यात्मिक रूप से जाग्रत थीं. उनके "ताटीचे अभंग" विख्यात हैं.

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संत जनाबाई

📍 जन्म: गंगाखेड, महाराष्ट्र (१३वे शतक) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत जनाबाई संत नामदेव के घर दासी थीं. घरेलू काम करते हुए भी उनका मन सदैव विठ्ठल स्मरण में लीन रहता था.

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संत बहिणाबाई

📍 जन्म: देवगाव, महाराष्ट्र (१६२८) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत बहिणाबाई संत तुकाराम की शिष्या थीं. उन्होंने पारिवारिक विरोधों के बावजूद अपनी भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया.

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संत सोयराबाई

📍 जन्म: मेहुणा राजा, महाराष्ट्र (१४वे शतक) 🕉️ आराध्य देव: Vitthal/Pandurang

संत सोयराबाई १४वीं सदी की वारकरी संप्रदाय की संत-कवयित्री और संत चोखामेला की पत्नी थीं.

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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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