संकष्टी चतुर्थी (१९६९)
Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार
व्रत का महत्व और जानकारी
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत कल्याणकारी व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। संकष्टी का अर्थ है संकटों को हरने वाली। विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा से जीवन की सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करने के लिए भक्त यह व्रत करते हैं। इस व्रत में रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्र देव की पूजा और अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रहता है। सुबह सामान्य पूजा करें। मुख्य पूजा और व्रत पारण रात में चंद्रोदय के बाद किया जाता है।
- श्री गणेश जी की मूर्ति या चित्र
- दूर्वा घास (21 दूर्वा की पत्तियां)
- लाल गुड़हल का फूल या अन्य लाल फूल
- लाल चंदन और सिंडूर
- धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक
- भोग के लिए मोदक या लड्डू
- नारियल, पान के पत्ते और सुपारी
- ताजे फल और शुद्ध जल
- चंद्र देव को अर्घ्य देने के लिए लोटा और कच्चा दूध-जल
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर दीपक जलाएं।
- पति जी को सिंदूर, लाल चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं।
- 21 दूर्वा की पत्तियां और लाल गुड़हल का फूल अर्पित करें।
- मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और आरती करें।
- दिनभर उपवास रखें और 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें।
- रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्र देव को दूध-मिश्रित जल का अर्घ्य दें।
- चंद्र दर्शन और पूजा के बाद गणेश जी की आरती कर प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।
वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय
| # | तारीख / दिनांक | वार | महीना / तिथि | शुभ मुहूर्त |
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| इस वर्ष के लिए कोई तिथि नहीं मिली। | ||||