ॐ

Todaycalendar

हिंदी पंचांग 1347

Advertisement
🕉
📿 व्रत और उपवास कैलेंडर ✦ 📍 PUNE

संकष्टी चतुर्थी (१३४७)

Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार

📍 Pune
१८.५२०४° N  ·  ७३.८५६७° E
📖

व्रत का महत्व और जानकारी

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत कल्याणकारी व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। संकष्टी का अर्थ है संकटों को हरने वाली। विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा से जीवन की सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करने के लिए भक्त यह व्रत करते हैं। इस व्रत में रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्र देव की पूजा और अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है।

✨ व्रत और पूजा का समय

संकष्टी चतुर्थी व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रहता है। सुबह सामान्य पूजा करें। मुख्य पूजा और व्रत पारण रात में चंद्रोदय के बाद किया जाता है।

📋 पूजा सामग्री
  • श्री गणेश जी की मूर्ति या चित्र
  • दूर्वा घास (21 दूर्वा की पत्तियां)
  • लाल गुड़हल का फूल या अन्य लाल फूल
  • लाल चंदन और सिंडूर
  • धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक
  • भोग के लिए मोदक या लड्डू
  • नारियल, पान के पत्ते और सुपारी
  • ताजे फल और शुद्ध जल
  • चंद्र देव को अर्घ्य देने के लिए लोटा और कच्चा दूध-जल
🪷 पूजा विधि
  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर दीपक जलाएं।
  3. पति जी को सिंदूर, लाल चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  4. 21 दूर्वा की पत्तियां और लाल गुड़हल का फूल अर्पित करें।
  5. मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और आरती करें।
  6. दिनभर उपवास रखें और 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करें।
  7. रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्र देव को दूध-मिश्रित जल का अर्घ्य दें।
  8. चंद्र दर्शन और पूजा के बाद गणेश जी की आरती कर प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।
📅

वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय

# तारीख / दिनांक वार महीना / तिथि शुभ मुहूर्त
१ ९ जनवरी १३४७ सोमवार माघ कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 14:46
२ ८ फरवरी १३४७ बुधवार फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 13:55
३ ९ मार्च १३४७ गुरुवार चैत्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 14:24
४ ७ मई १३४७ रविवार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 12:03
५ ६ जून १३४७ मंगलवार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 11:07
६ ५ जुलाई १३४७ बुधवार आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 10:24
७ ४ अगस्त १३४७ शुक्रवार श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 09:47
८ ३ सितंबर १३४७ रविवार भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 09:07
९ २ अक्टूबर १३४७ सोमवार आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 08:25
१० १ नवंबर १३४७ बुधवार कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 07:46
११ ३० नवंबर १३४७ गुरुवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 07:14
१२ ३० दिसंबर १३४७ शनिवार पौष कृष्ण पक्ष चतुर्थी चंद्रोदय: 07:31
🪷

भक्ति साहित्य (आरती, चालीसा, स्तोत्र व व्रत कथा)

🪔

गणेश आरती (जय गणेश देवा एवं सुखकर्ता दुखहर्ता)

aarti
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ ...
संपूर्ण आरती पढ़ें →
📿

श्री गणेश चालीसा (सम्पूर्ण ४० चौपाई)

chalisa
दोहा: जय गणपति सद्गुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥...
संपूर्ण चालीसा पढ़ें →
📖

संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (सम्पूर्ण गणेश पुराण कथा)

vrat katha
गणेश पुराण आधारित पारम्परिक संकष्टी चतुर्थी कथा:\n\nप्राचीन काल में राजा हरिश्चन्द्र के राज्य में एक निर्धन कुम्हार रहता था। एक बार जब उसने मिट्टी के बर्तन बनाकर उन्हें पकाने के लिए आवा (भट्टी) में लगाया, तो कई दिनों तक अग्नि जलाने पर भी बर्तन पके नहीं। कुम्हार चिंताकुल होकर राजा के पास गया। राजा के पुरोहितों ने परामर्श दिया कि यदि किसी बालक की बलि आवा में दी जाए, तो बर्तन पक जाएँगे।\n\nउसी नगर में एक वृद्धा ब्राह्मणी रहती थी, जिसका एक ही पुत्र था। कुम्हार ने छल से उस बालक को प्राप्त कर लिया। बालक की माता संकष्टी चतुर्थी की परम भक्त थी। उसने अपने पुत्र को प्रस्थान समय गणेश जी का सिद्ध रक्षासूत्र (संकष्ट नाशक धागा) बाँध दिया और स्वयं निर्जल रहकर भगवान गणेश का ध्यान करने लगी।\n\nजब बालक को आवा में डालकर अग्नि प्रज्वलित की गई, तब माता के कठोर व्रत और गणेश जी की कृपा से प्रचंड अग्नि भी शीतल हो गई। अगले दिन जब कुम्हार ने आवा खोला, तो देखा कि सारे बर्तन पक चुके थे और बालक हँसता हुआ खेल रहा था। यह चमत्कार देखकर राजा हरिश्चन्द्र और समस्त प्रजा अचंभित रह गई। कुम्हार ने अपना अपराध स्वीकार किया। तब से संकष्टी चतुर्थी पर संकट निवारण हेतु चंद्रोदय के समय पूजा का विधान प्रचलित हुआ।...
संपूर्ण व्रत कथा पढ़ें →
🕉️

व्रत प्रकार चुनें

अन्य व्रतों की तिथियां देखने के लिए चुनें:

📍

स्थान बदलें

पंचांग समय आपके स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।

📅

वर्ष बदलें

✨

पूजा विधि एवं नियम

१
सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रोदय तक निराहार या फलाहार व्रत रखें।
२
अनाज, चावल और दाल का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
३
व्रत के दौरान फल, दूध, जल या साबूदाना खिचड़ी ले सकते हैं।
४
रात को चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद ही व्रत का पारण करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
— पवित्र मंत्र
Advertisement
🪔
🪔

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

🪔
✨
🪔
🌸
✨
🌺
✕
🔒

प्रीमियम सामग्री (Premium Content)

वर्ष 1347 लॉक है

इस अनुभाग को देखने के लिए सक्रिय प्रो सदस्यता (Active Pro Subscription) या इस पृष्ठ की खरीद आवश्यक है।

📅 कैलेंडर 🪷 त्योहार 🔮 राशिफल