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अक्टूबर २८ – नवंबर ३, २०२७

आश्विन कृ. चतुर्दशी – कार्तिक शु. पंचमी

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ग्रेगोरियन २०२७
📅 साप्ताहिक पंचांग
आश्विन कृ. १४ – शु. ५
अक्टूबर २८–३, २०२७  ·  शक संवत १९४९ • विक्रम संवत २०८४
🌙 कृष्ण पक्ष
♒ कन्या चंद्र राशि
🪷 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
🪷 लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
७
दिन
४
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
गुरुवार
२८
चतुर्दशी
आश्विन कृ. १४ — गुरुवार, अक्टूबर २८
नक्षत्र: हस्त  |  योग: विष्कंभ  |  करण: विष्टि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३३
🌇सूर्यास्त१८:०२
🌙चंद्रोदय०६:०७
⏱दिन की अवधि११ घंटे २९ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रहस्त
योगविष्कंभ
करणविष्टि
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:३३ – ०७:५९
रोग ०७:५९ – ०९:२५
उद्वेग ०९:२५ – १०:५२
चर १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१३:४४ – १५:१०
यमगंड
०६:३३ – ०७:५९
शुक्रवार
२९
अमावस्या
आश्विन कृ. १५ — शुक्रवार, अक्टूबर २९
नक्षत्र: चित्रा  |  योग: प्रीति  |  करण: चतुष्पाद
🌑 लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३४
🌇सूर्यास्त१८:०२
🌙चंद्रास्त१७:४१
⏱दिन की अवधि११ घंटे २८ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रचित्रा
योगप्रीति
करणचतुष्पाद
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
चर ०६:३४ – ०८:००
लाभ ०८:०० – ०९:२६
अमृत ०९:२६ – १०:५२
काल १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१०:५२ – १२:१८
यमगंड
१५:१० – १६:३६
शनिवार
३०
प्रतिपदा
कार्तिक शु. १ — शनिवार, अक्टूबर ३०
नक्षत्र: स्वाति  |  योग: आयुष्मान  |  करण: बव
गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३४
🌇सूर्यास्त१८:०१
🌙चंद्रोदय०७:०७
⏱दिन की अवधि११ घंटे २७ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रस्वाति
योगआयुष्मान
करणबव
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
काल ०६:३४ – ०८:००
शुभ ०८:०० – ०९:२६
रोग ०९:२६ – १०:५२
उद्वेग १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४१
राहुकाल ⚠
०९:२६ – १०:५२
यमगंड
१३:४४ – १५:०९
रविवार
३१
द्वितीया
कार्तिक शु. २ — रविवार, अक्टूबर ३१
नक्षत्र: विशाखा  |  योग: सौभाग्य  |  करण: कौलव
भाई दूज 🌍 राष्ट्रीय एकता दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३४
🌇सूर्यास्त१८:०१
🌙चंद्रोदय०८:०७
⏱दिन की अवधि११ घंटे २६ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रविशाखा
योगसौभाग्य
करणकौलव
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:३४ – ०८:००
चर ०८:०० – ०९:२६
लाभ ०९:२६ – १०:५२
अमृत १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४०
राहुकाल ⚠
१६:३५ – १८:०१
यमगंड
१२:१८ – १३:४३
सोमवार
१
तृतीया
कार्तिक शु. ३ — सोमवार, नवंबर १
नक्षत्र: अनुराधा  |  योग: शोभन  |  करण: गर
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३५
🌇सूर्यास्त१८:००
🌙चंद्रोदय०९:०६
⏱दिन की अवधि११ घंटे २५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रअनुराधा
योगशोभन
करणगर
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:३५ – ०८:०१
काल ०८:०१ – ०९:२६
शुभ ०९:२६ – १०:५२
रोग १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४०
राहुकाल ⚠
०८:०१ – ०९:२६
यमगंड
१०:५२ – १२:१८
मंगलवार
२
चतुर्थी
कार्तिक शु. ४ — मंगलवार, नवंबर २
नक्षत्र: ज्येष्ठा  |  योग: अतिगंड  |  करण: विष्टि
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३५
🌇सूर्यास्त१८:००
🌙चंद्रोदय१०:०१
⏱दिन की अवधि११ घंटे २४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रज्येष्ठा
योगअतिगंड
करणविष्टि
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:३५ – ०८:०१
उद्वेग ०८:०१ – ०९:२६
चर ०९:२६ – १०:५२
लाभ १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४०
राहुकाल ⚠
१५:०९ – १६:३४
यमगंड
०९:२६ – १०:५२
बुधवार
३
पंचमी
कार्तिक शु. ५ — बुधवार, नवंबर ३
नक्षत्र: मूल  |  योग: सुकर्मा  |  करण: बव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३६
🌇सूर्यास्त१७:५९
🌙चंद्रोदय१०:५३
⏱दिन की अवधि११ घंटे २३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रमूल
योगसुकर्मा
करणबव
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:३६ – ०८:०१
अमृत ०८:०१ – ०९:२७
काल ०९:२७ – १०:५२
शुभ १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४०
राहुकाल ⚠
१२:१८ – १३:४३
यमगंड
०८:०१ – ०९:२७
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिचतुर्दशी – पंचमी
महीनाआश्विन
सूर्योदय⬆ ०६:३३ → ०६:३६
सूर्यास्त⬇ १८:०२ → १७:५९
विक्रम संवत२०८४
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

गुरुवार, अक्टूबर २८ · चतुर्दशी

🪷

लक्ष्मी पूजन (दीपावली)

शुक्रवार, अक्टूबर २९ · अमावस्या

🪷

गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा

शनिवार, अक्टूबर ३० · प्रतिपदा

🪷

भाई दूज

रविवार, अक्टूबर ३१ · द्वितीया

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यतुला
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रकन्या → धनु
🪐विक्रम संवतशक संवत १९४९
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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