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अक्टूबर १७–२३, २०२८

आश्विन कृ. चतुर्दशी – कार्तिक शु. षष्ठी

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ग्रेगोरियन २०२८
📅 साप्ताहिक पंचांग
आश्विन कृ. १४ – शु. ६
अक्टूबर १७–२३, २०२८  ·  शक संवत १९५० • विक्रम संवत २०८५
🌙 कृष्ण पक्ष
♒ कन्या चंद्र राशि
🪷 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
🪷 लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
७
दिन
४
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
मंगलवार
१७
चतुर्दशी
आश्विन कृ. १४ — मंगलवार, अक्टूबर १७
नक्षत्र: हस्त  |  योग: इंद्र  |  करण: शकुनि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३०
🌇सूर्यास्त१८:०९
🌙चंद्रोदय०६:२८
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३९ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रहस्त
योगइंद्र
करणशकुनि
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:३० – ०७:५७
उद्वेग ०७:५७ – ०९:२४
चर ०९:२४ – १०:५२
लाभ १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१५:१४ – १६:४१
यमगंड
०९:२४ – १०:५२
बुधवार
१८
अमावस्या
आश्विन कृ. १५ — बुधवार, अक्टूबर १८
नक्षत्र: चित्रा  |  योग: विष्कंभ  |  करण: नाग
🌑 गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३०
🌇सूर्यास्त१८:०८
🌙चंद्रास्त१८:०९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३८ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रचित्रा
योगविष्कंभ
करणनाग
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:३० – ०७:५७
अमृत ०७:५७ – ०९:२५
काल ०९:२५ – १०:५२
शुभ १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४२
राहुकाल ⚠
१२:१९ – १३:४६
यमगंड
०७:५७ – ०९:२५
गुरुवार
१९
द्वितीया
कार्तिक शु. २ — गुरुवार, अक्टूबर १९
नक्षत्र: स्वाति  |  योग: प्रीति  |  करण: बालव
भाई दूज
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३०
🌇सूर्यास्त१८:०७
🌙चंद्रोदय०७:३३
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३७ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रस्वाति
योगप्रीति
करणबालव
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:३० – ०७:५७
रोग ०७:५७ – ०९:२५
उद्वेग ०९:२५ – १०:५२
चर १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४२
राहुकाल ⚠
१३:४६ – १५:१३
यमगंड
०६:३० – ०७:५७
शुक्रवार
२०
तृतीया
कार्तिक शु. ३ — शुक्रवार, अक्टूबर २०
नक्षत्र: विशाखा  |  योग: आयुष्मान  |  करण: तैतिल
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३१
🌇सूर्यास्त१८:०७
🌙चंद्रोदय०८:३९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३६ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रविशाखा
योगआयुष्मान
करणतैतिल
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
चर ०६:३१ – ०७:५८
लाभ ०७:५८ – ०९:२५
अमृत ०९:२५ – १०:५२
काल १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४२
राहुकाल ⚠
१०:५२ – १२:१९
यमगंड
१५:१३ – १६:४०
शनिवार
२१
चतुर्थी
कार्तिक शु. ४ — शनिवार, अक्टूबर २१
नक्षत्र: अनुराधा  |  योग: सौभाग्य  |  करण: वणिज
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३१
🌇सूर्यास्त१८:०६
🌙चंद्रोदय०९:४२
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रअनुराधा
योगसौभाग्य
करणवणिज
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
काल ०६:३१ – ०७:५८
शुभ ०७:५८ – ०९:२५
रोग ०९:२५ – १०:५२
उद्वेग १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४२
राहुकाल ⚠
०९:२५ – १०:५२
यमगंड
१३:४५ – १५:१२
रविवार
२२
पंचमी
कार्तिक शु. ५ — रविवार, अक्टूबर २२
नक्षत्र: ज्येष्ठा  |  योग: शोभन  |  करण: बव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३१
🌇सूर्यास्त१८:०५
🌙चंद्रोदय१०:४२
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रज्येष्ठा
योगशोभन
करणबव
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:३१ – ०७:५८
चर ०७:५८ – ०९:२५
लाभ ०९:२५ – १०:५२
अमृत १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४२
राहुकाल ⚠
१६:३९ – १८:०५
यमगंड
१२:१८ – १३:४५
सोमवार
२३
षष्ठी
कार्तिक शु. ६ — सोमवार, अक्टूबर २३
नक्षत्र: मूल  |  योग: अतिगंड  |  करण: कौलव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३२
🌇सूर्यास्त१८:०५
🌙चंद्रोदय११:३६
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रमूल
योगअतिगंड
करणकौलव
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:३२ – ०७:५८
काल ०७:५८ – ०९:२५
शुभ ०९:२५ – १०:५२
रोग १०:५२ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४१
राहुकाल ⚠
०७:५८ – ०९:२५
यमगंड
१०:५२ – १२:१८
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिचतुर्दशी – षष्ठी
महीनाआश्विन
सूर्योदय⬆ ०६:३० → ०६:३२
सूर्यास्त⬇ १८:०९ → १८:०५
विक्रम संवत२०८५
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

मंगलवार, अक्टूबर १७ · चतुर्दशी

🪷

लक्ष्मी पूजन (दीपावली)

मंगलवार, अक्टूबर १७ · चतुर्दशी

🪷

गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा

बुधवार, अक्टूबर १८ · अमावस्या

🪷

भाई दूज

गुरुवार, अक्टूबर १९ · द्वितीया

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यकन्या
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रकन्या → धनु
🪐विक्रम संवतशक संवत १९५०
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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