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अक्टूबर ११–१७, २०२८

आश्विन कृ. अष्टमी – आश्विन कृ. चतुर्दशी

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ग्रेगोरियन २०२८
📅 साप्ताहिक पंचांग
आश्विन कृ. ८ – कृ. १४
अक्टूबर ११–१७, २०२८  ·  शक संवत १९५० • विक्रम संवत २०८५
🌙 कृष्ण पक्ष
♒ मिथुन चंद्र राशि
🪷 धनतेरस (धनत्रयोदशी)
🪷 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
७
दिन
३
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
बुधवार
११
अष्टमी
आश्विन कृ. ८ — बुधवार, अक्टूबर ११
नक्षत्र: आर्द्रा  |  योग: परिघ  |  करण: बालव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१३
🌙चंद्रोदय००:२०
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रआर्द्रा
योगपरिघ
करणबालव
चंद्र राशिमिथुन
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:२८ – ०७:५६
अमृत ०७:५६ – ०९:२४
काल ०९:२४ – १०:५२
शुभ १०:५२ – १२:२१
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१२:२१ – १३:४९
यमगंड
०७:५६ – ०९:२४
गुरुवार
१२
नवमी
आश्विन कृ. ९ — गुरुवार, अक्टूबर १२
नक्षत्र: पुनर्वसु  |  योग: सिद्ध  |  करण: तैतिल
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१२
🌙चंद्रोदय०१:२०
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपुनर्वसु
योगसिद्ध
करणतैतिल
चंद्र राशिकर्क
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:२८ – ०७:५६
रोग ०७:५६ – ०९:२४
उद्वेग ०९:२४ – १०:५२
चर १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१३:४८ – १५:१६
यमगंड
०६:२८ – ०७:५६
शुक्रवार
१३
दशमी
आश्विन कृ. १० — शुक्रवार, अक्टूबर १३
नक्षत्र: पुष्य  |  योग: साध्य  |  करण: वणिज
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१२
🌙चंद्रोदय०२:२१
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपुष्य
योगसाध्य
करणवणिज
चंद्र राशिकर्क
🕐 चौघड़िया
चर ०६:२९ – ०७:५६
लाभ ०७:५६ – ०९:२४
अमृत ०९:२४ – १०:५२
काल १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१०:५२ – १२:२०
यमगंड
१५:१६ – १६:४४
शनिवार
१४
एकादशी
आश्विन कृ. ११ — शनिवार, अक्टूबर १४
नक्षत्र: आश्लेषा  |  योग: शुभ  |  करण: बव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:११
🌙चंद्रोदय०३:२२
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४२ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रआश्लेषा
योगशुभ
करणबव
चंद्र राशिकर्क
🕐 चौघड़िया
काल ०६:२९ – ०७:५७
शुभ ०७:५७ – ०९:२४
रोग ०९:२४ – १०:५२
उद्वेग १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
०९:२४ – १०:५२
यमगंड
१३:४८ – १५:१५
रविवार
१५
द्वादशी
आश्विन कृ. १२ — रविवार, अक्टूबर १५
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी  |  योग: शुक्ल  |  करण: कौलव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१०
🌙चंद्रोदय०४:२३
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४१ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी
योगशुक्ल
करणकौलव
चंद्र राशिसिंह
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:२९ – ०७:५७
चर ०७:५७ – ०९:२४
लाभ ०९:२४ – १०:५२
अमृत १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१६:४३ – १८:१०
यमगंड
१२:२० – १३:४७
सोमवार
१६
त्रयोदशी
आश्विन कृ. १३ — सोमवार, अक्टूबर १६
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी  |  योग: ब्रह्म  |  करण: वणिज
धनतेरस (धनत्रयोदशी) 🌍 विश्व खाद्य दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:०९
🌙चंद्रोदय०५:२५
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४० मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनी
योगब्रह्म
करणवणिज
चंद्र राशिसिंह
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:२९ – ०७:५७
काल ०७:५७ – ०९:२४
शुभ ०९:२४ – १०:५२
रोग १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
०७:५७ – ०९:२४
यमगंड
१०:५२ – १२:१९
मंगलवार
१७
चतुर्दशी
आश्विन कृ. १४ — मंगलवार, अक्टूबर १७
नक्षत्र: हस्त  |  योग: इंद्र  |  करण: शकुनि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३०
🌇सूर्यास्त१८:०९
🌙चंद्रोदय०६:२८
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३९ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रहस्त
योगइंद्र
करणशकुनि
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:३० – ०७:५७
उद्वेग ०७:५७ – ०९:२४
चर ०९:२४ – १०:५२
लाभ १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१५:१४ – १६:४१
यमगंड
०९:२४ – १०:५२
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिअष्टमी – चतुर्दशी
महीनाआश्विन
सूर्योदय⬆ ०६:२८ → ०६:३०
सूर्यास्त⬇ १८:१३ → १८:०९
विक्रम संवत२०८५
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

धनतेरस (धनत्रयोदशी)

सोमवार, अक्टूबर १६ · त्रयोदशी

🪷

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

मंगलवार, अक्टूबर १७ · चतुर्दशी

🪷

लक्ष्मी पूजन (दीपावली)

मंगलवार, अक्टूबर १७ · चतुर्दशी

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यकन्या
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रमिथुन → कन्या
🪐विक्रम संवतशक संवत १९५०
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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