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अक्टूबर ११–१७, २००४

भाद्रपद कृ. द्वादशी – आश्विन शु. चतुर्थी

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ग्रेगोरियन २००४
📅 साप्ताहिक पंचांग
भाद्रपद कृ. १२ – शु. ४
अक्टूबर ११–१७, २००४  ·  शक संवत १९२६ • विक्रम संवत २०६१
🌙 कृष्ण पक्ष
♒ सिंह चंद्र राशि
🪷 शरद नवरात्रि प्रारंभ
🪷 शरद नवरात्रि प्रारंभ
७
दिन
३
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
सोमवार
११
द्वादशी
भाद्रपद कृ. १२ — सोमवार, अक्टूबर ११
नक्षत्र: पूर्वा फाल्गुनी  |  योग: शुक्ल  |  करण: तैतिल
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१३
🌙चंद्रोदय०४:४०
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपूर्वा फाल्गुनी
योगशुक्ल
करणतैतिल
चंद्र राशिसिंह
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:२८ – ०७:५६
काल ०७:५६ – ०९:२४
शुभ ०९:२४ – १०:५२
रोग १०:५२ – १२:२१
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
०७:५६ – ०९:२४
यमगंड
१०:५२ – १२:२१
मंगलवार
१२
त्रयोदशी
भाद्रपद कृ. १३ — मंगलवार, अक्टूबर १२
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी  |  योग: ब्रह्म  |  करण: वणिज
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१३
🌙चंद्रोदय०५:३४
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रउत्तरा फाल्गुनी
योगब्रह्म
करणवणिज
चंद्र राशिसिंह
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:२८ – ०७:५६
उद्वेग ०७:५६ – ०९:२४
चर ०९:२४ – १०:५२
लाभ १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१५:१६ – १६:४४
यमगंड
०९:२४ – १०:५२
बुधवार
१३
चतुर्दशी
भाद्रपद कृ. १४ — बुधवार, अक्टूबर १३
नक्षत्र: हस्त  |  योग: इंद्र  |  करण: शकुनि
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१२
🌙चंद्रास्त१७:४८
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रहस्त
योगइंद्र
करणशकुनि
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:२९ – ०७:५६
अमृत ०७:५६ – ०९:२४
काल ०९:२४ – १०:५२
शुभ १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१२:२० – १३:४८
यमगंड
०७:५६ – ०९:२४
गुरुवार
१४
अमावस्या
भाद्रपद कृ. १५ — गुरुवार, अक्टूबर १४
नक्षत्र: चित्रा  |  योग: वैधृति  |  करण: नाग
🌑
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:११
🌙चंद्रोदय०६:२९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४२ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रचित्रा
योगवैधृति
करणनाग
चंद्र राशिकन्या
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:२९ – ०७:५७
रोग ०७:५७ – ०९:२४
उद्वेग ०९:२४ – १०:५२
चर १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१३:४८ – १५:१५
यमगंड
०६:२९ – ०७:५७
शुक्रवार
१५
प्रतिपदा
आश्विन शु. १ — शुक्रवार, अक्टूबर १५
नक्षत्र: स्वाति  |  योग: विष्कंभ  |  करण: बव
शरद नवरात्रि प्रारंभ
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१०
🌙चंद्रोदय०७:२७
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४१ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रस्वाति
योगविष्कंभ
करणबव
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
चर ०६:२९ – ०७:५७
लाभ ०७:५७ – ०९:२४
अमृत ०९:२४ – १०:५२
काल १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१०:५२ – १२:२०
यमगंड
१५:१५ – १६:४३
शनिवार
१६
तृतीया
आश्विन शु. ३ — शनिवार, अक्टूबर १६
नक्षत्र: विशाखा  |  योग: प्रीति  |  करण: तैतिल
शरद नवरात्रि प्रारंभ 🌍 विश्व खाद्य दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१०
🌙चंद्रोदय०८:२८
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४० मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रविशाखा
योगप्रीति
करणतैतिल
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
काल ०६:२९ – ०७:५७
शुभ ०७:५७ – ०९:२४
रोग ०९:२४ – १०:५२
उद्वेग १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
०९:२४ – १०:५२
यमगंड
१३:४७ – १५:१५
रविवार
१७
चतुर्थी
आश्विन शु. ४ — रविवार, अक्टूबर १७
नक्षत्र: अनुराधा  |  योग: आयुष्मान  |  करण: वणिज
शरद नवरात्रि प्रारंभ
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:३०
🌇सूर्यास्त१८:०९
🌙चंद्रोदय०९:३३
⏱दिन की अवधि११ घंटे ३९ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रअनुराधा
योगआयुष्मान
करणवणिज
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:३० – ०७:५७
चर ०७:५७ – ०९:२४
लाभ ०९:२४ – १०:५२
अमृत १०:५२ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१६:४२ – १८:०९
यमगंड
१२:१९ – १३:४७
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिद्वादशी – चतुर्थी
महीनाभाद्रपद
सूर्योदय⬆ ०६:२८ → ०६:३०
सूर्यास्त⬇ १८:१३ → १८:०९
विक्रम संवत२०६१
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

शुक्रवार, अक्टूबर १५ · प्रतिपदा

🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

शनिवार, अक्टूबर १६ · तृतीया

🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

रविवार, अक्टूबर १७ · चतुर्थी

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यकन्या
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रसिंह → वृश्चिक
🪐विक्रम संवतशक संवत १९२६
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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