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नवंबर ११–१७, २००४

आश्विन कृ. चतुर्दशी – कार्तिक शु. षष्ठी

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ग्रेगोरियन २००४
📅 साप्ताहिक पंचांग
आश्विन कृ. १४ – शु. ६
नवंबर ११–१७, २००४  ·  शक संवत १९२६ • विक्रम संवत २०६१
🌙 कृष्ण पक्ष
♒ तुला चंद्र राशि
🪷 नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
🪷 लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
७
दिन
४
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
गुरुवार
११
चतुर्दशी
आश्विन कृ. १४ — गुरुवार, नवंबर ११
नक्षत्र: चित्रा  |  योग: आयुष्मान  |  करण: विष्टि
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) 🌍 राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४०
🌇सूर्यास्त१७:५६
🌙चंद्रोदय०६:११
⏱दिन की अवधि११ घंटे १६ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रचित्रा
योगआयुष्मान
करणविष्टि
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:४० – ०८:०४
रोग ०८:०४ – ०९:२९
उद्वेग ०९:२९ – १०:५३
चर १०:५३ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५५ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१३:४३ – १५:०७
यमगंड
०६:४० – ०८:०४
शुक्रवार
१२
अमावस्या
आश्विन कृ. १५ — शुक्रवार, नवंबर १२
नक्षत्र: स्वाति  |  योग: सौभाग्य  |  करण: चतुष्पाद
🌑 लक्ष्मी पूजन (दीपावली)
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४०
🌇सूर्यास्त१७:५६
🌙चंद्रास्त१७:४३
⏱दिन की अवधि११ घंटे १५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रस्वाति
योगसौभाग्य
करणचतुष्पाद
चंद्र राशितुला
🕐 चौघड़िया
चर ०६:४० – ०८:०५
लाभ ०८:०५ – ०९:२९
अमृत ०९:२९ – १०:५४
काल १०:५४ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१०:५४ – १२:१८
यमगंड
१५:०७ – १६:३२
शनिवार
१३
प्रतिपदा
कार्तिक शु. १ — शनिवार, नवंबर १३
नक्षत्र: विशाखा  |  योग: शोभन  |  करण: बव
गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४१
🌇सूर्यास्त१७:५६
🌙चंद्रोदय०७:१५
⏱दिन की अवधि११ घंटे १४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रविशाखा
योगशोभन
करणबव
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
काल ०६:४१ – ०८:०५
शुभ ०८:०५ – ०९:३०
रोग ०९:३० – १०:५४
उद्वेग १०:५४ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४१
राहुकाल ⚠
०९:३० – १०:५४
यमगंड
१३:४३ – १५:०७
रविवार
१४
द्वितीया
कार्तिक शु. २ — रविवार, नवंबर १४
नक्षत्र: ज्येष्ठा  |  योग: अतिगंड  |  करण: कौलव
भाई दूज 🌍 बाल दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४१
🌇सूर्यास्त१७:५५
🌙चंद्रोदय०८:२३
⏱दिन की अवधि११ घंटे १४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रज्येष्ठा
योगअतिगंड
करणकौलव
चंद्र राशिवृश्चिक
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:४१ – ०८:०६
चर ०८:०६ – ०९:३०
लाभ ०९:३० – १०:५४
अमृत १०:५४ – १२:१८
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१६:३१ – १७:५५
यमगंड
१२:१८ – १३:४३
सोमवार
१५
तृतीया
कार्तिक शु. ३ — सोमवार, नवंबर १५
नक्षत्र: मूल  |  योग: सुकर्मा  |  करण: गर
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४२
🌇सूर्यास्त१७:५५
🌙चंद्रोदय०९:३२
⏱दिन की अवधि११ घंटे १३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रमूल
योगसुकर्मा
करणगर
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:४२ – ०८:०६
काल ०८:०६ – ०९:३०
शुभ ०९:३० – १०:५४
रोग १०:५४ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४१
राहुकाल ⚠
०८:०६ – ०९:३०
यमगंड
१०:५४ – १२:१९
मंगलवार
१६
चतुर्थी
कार्तिक शु. ४ — मंगलवार, नवंबर १६
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा  |  योग: शूल  |  करण: विष्टि
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४३
🌇सूर्यास्त१७:५५
🌙चंद्रोदय१०:३७
⏱दिन की अवधि११ घंटे १२ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा
योगशूल
करणविष्टि
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:४३ – ०८:०७
उद्वेग ०८:०७ – ०९:३१
चर ०९:३१ – १०:५५
लाभ १०:५५ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१५:०७ – १६:३१
यमगंड
०९:३१ – १०:५५
बुधवार
१७
षष्ठी
कार्तिक शु. ६ — बुधवार, नवंबर १७
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा  |  योग: गंड  |  करण: कौलव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:४३
🌇सूर्यास्त१७:५५
🌙चंद्रोदय११:३६
⏱दिन की अवधि११ घंटे ११ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगगंड
करणकौलव
चंद्र राशिमकर
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:४३ – ०८:०७
अमृत ०८:०७ – ०९:३१
काल ०९:३१ – १०:५५
शुभ १०:५५ – १२:१९
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४१
राहुकाल ⚠
१२:१९ – १३:४३
यमगंड
०८:०७ – ०९:३१
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षकृष्ण पक्ष
तिथिचतुर्दशी – षष्ठी
महीनाआश्विन
सूर्योदय⬆ ०६:४० → ०६:४३
सूर्यास्त⬇ १७:५६ → १७:५५
विक्रम संवत२०६१
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

गुरुवार, नवंबर ११ · चतुर्दशी

🪷

लक्ष्मी पूजन (दीपावली)

शुक्रवार, नवंबर १२ · अमावस्या

🪷

गोवर्धन पूजा / बलि प्रतिपदा

शनिवार, नवंबर १३ · प्रतिपदा

🪷

भाई दूज

रविवार, नवंबर १४ · द्वितीया

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यतुला
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रतुला → मकर
🪐विक्रम संवतशक संवत १९२६
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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