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अक्टूबर १०–१६, २००५

आश्विन शु. सप्तमी – आश्विन शु. चतुर्दशी

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ग्रेगोरियन २००५
📅 साप्ताहिक पंचांग
आश्विन शु. ७ – शु. १४
अक्टूबर १०–१६, २००५  ·  शक संवत १९२७ • विक्रम संवत २०६२
🌙 शुक्ल पक्ष
♒ धनु चंद्र राशि
🪷 शरद नवरात्रि प्रारंभ
🪷 शरद नवरात्रि प्रारंभ
७
दिन
४
त्योहार और व्रत
०
सार्वजनिक अवकाश
🌙
पक्ष
सोमवार
१०
सप्तमी
आश्विन शु. ७ — सोमवार, अक्टूबर १०
नक्षत्र: मूल  |  योग: शोभन  |  करण: वणिज
शरद नवरात्रि प्रारंभ
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१४
🌙चंद्रोदय१२:५०
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४६ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रमूल
योगशोभन
करणवणिज
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
अमृत ०६:२८ – ०७:५६
काल ०७:५६ – ०९:२४
शुभ ०९:२४ – १०:५३
रोग १०:५३ – १२:२१
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४५
राहुकाल ⚠
०७:५६ – ०९:२४
यमगंड
१०:५३ – १२:२१
मंगलवार
११
अष्टमी
आश्विन शु. ८ — मंगलवार, अक्टूबर ११
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा  |  योग: सुकर्मा  |  करण: बव
शरद नवरात्रि प्रारंभ
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१३
🌙चंद्रोदय१३:४७
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४५ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
योगसुकर्मा
करणबव
चंद्र राशिधनु
🕐 चौघड़िया
रोग ०६:२८ – ०७:५६
उद्वेग ०७:५६ – ०९:२४
चर ०९:२४ – १०:५३
लाभ १०:५३ – १२:२१
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१५:१७ – १६:४५
यमगंड
०९:२४ – १०:५३
बुधवार
१२
नवमी
आश्विन शु. ९ — बुधवार, अक्टूबर १२
नक्षत्र: श्रवण  |  योग: धृति  |  करण: कौलव
शरद नवरात्रि प्रारंभ दशहरा / विजयादशमी
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१३
🌙चंद्रोदय१४:३९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४४ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रश्रवण
योगधृति
करणकौलव
चंद्र राशिमकर
🕐 चौघड़िया
लाभ ०६:२८ – ०७:५६
अमृत ०७:५६ – ०९:२४
काल ०९:२४ – १०:५२
शुभ १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१२:२० – १३:४९
यमगंड
०७:५६ – ०९:२४
गुरुवार
१३
दशमी
आश्विन शु. १० — गुरुवार, अक्टूबर १३
नक्षत्र: धनिष्ठा  |  योग: शूल  |  करण: गर
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२८
🌇सूर्यास्त१८:१२
🌙चंद्रोदय१५:२६
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४३ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रधनिष्ठा
योगशूल
करणगर
चंद्र राशिमकर
🕐 चौघड़िया
शुभ ०६:२८ – ०७:५६
रोग ०७:५६ – ०९:२४
उद्वेग ०९:२४ – १०:५२
चर १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४४
राहुकाल ⚠
१३:४८ – १५:१६
यमगंड
०६:२८ – ०७:५६
शुक्रवार
१४
द्वादशी
आश्विन शु. १२ — शुक्रवार, अक्टूबर १४
नक्षत्र: शतभिषा  |  योग: गंड  |  करण: बव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:११
🌙चंद्रोदय१६:०९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४२ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रशतभिषा
योगगंड
करणबव
चंद्र राशिकुंभ
🕐 चौघड़िया
चर ०६:२९ – ०७:५७
लाभ ०७:५७ – ०९:२४
अमृत ०९:२४ – १०:५२
काल १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५७ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१०:५२ – १२:२०
यमगंड
१५:१६ – १६:४३
शनिवार
१५
त्रयोदशी
आश्विन शु. १३ — शनिवार, अक्टूबर १५
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद  |  योग: वृद्धि  |  करण: कौलव
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१०
🌙चंद्रोदय१६:४९
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४१ मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रपूर्वाभाद्रपद
योगवृद्धि
करणकौलव
चंद्र राशिकुंभ
🕐 चौघड़िया
काल ०६:२९ – ०७:५७
शुभ ०७:५७ – ०९:२४
रोग ०९:२४ – १०:५२
उद्वेग १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
०९:२४ – १०:५२
यमगंड
१३:४७ – १५:१५
रविवार
१६
चतुर्दशी
आश्विन शु. १४ — रविवार, अक्टूबर १६
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद  |  योग: ध्रुव  |  करण: गर
🌍 विश्व खाद्य दिवस
🌅 खगोलीय जानकारी
🌅सूर्योदय०६:२९
🌇सूर्यास्त१८:१०
🌙चंद्रोदय१७:२७
⏱दिन की अवधि११ घंटे ४० मिनट
📿 पंचांग विवरण
नक्षत्रउत्तराभाद्रपद
योगध्रुव
करणगर
चंद्र राशिमीन
🕐 चौघड़िया
उद्वेग ०६:२९ – ०७:५७
चर ०७:५७ – ०९:२४
लाभ ०९:२४ – १०:५२
अमृत १०:५२ – १२:२०
⏰ शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त
११:५६ – १२:४३
राहुकाल ⚠
१६:४२ – १८:१०
यमगंड
१२:२० – १३:४७
📋 साप्ताहिक सारांश
पक्षशुक्ल पक्ष
तिथिसप्तमी – चतुर्दशी
महीनाआश्विन
सूर्योदय⬆ ०६:२८ → ०६:२९
सूर्यास्त⬇ १८:१४ → १८:१०
विक्रम संवत२०६२
🎊 इस सप्ताह के त्योहार
🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

सोमवार, अक्टूबर १० · सप्तमी

🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

मंगलवार, अक्टूबर ११ · अष्टमी

🪷

शरद नवरात्रि प्रारंभ

बुधवार, अक्टूबर १२ · नवमी

🪷

दशहरा / विजयादशमी

बुधवार, अक्टूबर १२ · नवमी

✨ शुभ मुहूर्त
💍

विवाह मुहूर्त

इस सप्ताह का अभिजित मुहूर्त और अमृत योग उत्तम है।

🏠

गृहप्रवेश व नवीन खरेदी

शुभ चौघड़िया और अमृत काल में उत्तम मुहूर्त निर्धारित किया जा सकता है।

🌍 ग्रह स्थिति
☀️if($langCode==='gu')સૂર્ય@elseसूर्यकन्या
🌙if($langCode==='gu')ચંદ્ર@elseचंद्रधनु → मीन
🪐विक्रम संवतशक संवत १९२७
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
— सरस्वती स्तोत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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