भक्ती साहित्य
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आरती
कृष्ण आरती (आरती कुंजबिहारी की)
कृष्ण आरती (आरती कुंजबिहारी की)
आरती कुञ्जबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
गले में वैजयन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नन्द के आनन्द नन्दलाला॥
गगन सदृश घनश्याम कान्ति, मोर मुकुट बनमाला भाति।
चमकत चरण कमल कान्ति, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुञ्जबिहारी की...
कनकमयी मणि मुकुट विराजै, अलकावलि कपोलन छाजै।
हंसनि ग्रीव तरणि सुत भ्राजै, मोर मुकुट बनमाला साजै॥
आरती कुञ्जबिहारी की...
कनकमयी कटि काछनी सोहै, मणिनूपुर मणिनूपुर ध्वनि मोहै।
चरण कमल मनमोहन जोहै, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुञ्जबिहारी की...
जहाँ से प्रगटी गङ्गा धारा, कलुष हारिणी श्री यमुना धारा।
दास त्रिलोकी शरण तुम्हारा, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुञ्जबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
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॥ संपूर्णम् ॥
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