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मराठी पंचांग 2026

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🪔 भक्ती साहित्य आरती

दुर्गा आरती (जय अंबे गौरी)

दुर्गा आरती (जय अंबे गौरी)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चन्द्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों। बाजीर्ण ताल मृदङ्गा, अरु बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ तुम हो जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हर्ता, सुख सम्पति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ कञ्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकोश में ध्यावत, राजत दिन राती॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥ श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥ ॐ जय अम्बे गौरी॥

॥ संपूर्णम् ॥

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
— श्री देवी मंत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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