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हिंदी पंचांग 2073

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📿 व्रत और उपवास कैलेंडर 📍 PUNE

प्रदोष व्रत (२०७३)

Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार

📍 Pune
१८.५२०४° N  ·  ७३.८५६७° E
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व्रत का महत्व और जानकारी

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक अत्यंत मंगलकारी व्रत है, जो त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के समय को कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन महादेव ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का पान कर सृष्टि की रक्षा की थी। इस दिन संध्याकाल में शिव पूजा करने से सभी पाप मिटते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

✨ व्रत और पूजा का समय

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद) में की जानी चाहिए। इसी समय शिव जी प्रसन्न होते हैं। पूजा के बाद व्रत का पारण करें।

📋 पूजा सामग्री
  • शिवलिंग या शिव परिवार का चित्र
  • ताजे बेलपत्र (बिल्व पत्र)
  • धतूरे का फूल और फल
  • सफेद चंदन और भस्म (विभूति)
  • अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी) और गंगाजल
  • सफेद फूल और अक्षत (बिना टूटे चावल)
  • धूप, अगरबत्ती और आरती के लिए कपूर-दीपक
  • ताजे फल और शुद्ध जल
🪷 पूजा विधि
  1. सुबह उठकर स्नान करें और शिव पूजा का संकल्प लें।
  2. सुबह शिवजी को जल और बेलपत्र चढ़ाएं।
  3. दिनभर उपवास रखें और मन में शिव नाम का जप करें।
  4. संध्या समय (प्रदोष काल) में पुनः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  5. शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  6. शिवलिंग पर चंदन-भस्म लगाएं और बेलपत्र व धतूरा चढ़ाएं।
  7. प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  8. कपूर से आरती करें और भगवान को भोग लगाकर व्रत खोलें।
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वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय

# तारीख / दिनांक वार महीना / तिथि शुभ मुहूर्त
५ जनवरी २०७३ गुरुवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:10 – 20:34
२१ जनवरी २०७३ शनिवार पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:20 – 20:44
४ फरवरी २०७३ शनिवार पौष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:28 – 20:52
२० फरवरी २०७३ सोमवार माघ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:36 – 21:00
६ मार्च २०७३ सोमवार माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:40 – 21:04
२१ मार्च २०७३ मंगलवार फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:44 – 21:08
४ अप्रैल २०७३ मंगलवार फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:47 – 21:11
१९ अप्रैल २०७३ बुधवार चैत्र शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:51 – 21:15
४ मई २०७३ गुरुवार चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:56 – 21:20
१० १९ मई २०७३ शुक्रवार वैशाख शुक्ल पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 19:01 – 21:25
११ ३ जून २०७३ शनिवार वैशाख कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 19:07 – 21:31
१२ १७ जून २०७३ शनिवार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 19:11 – 21:35
१३ २ जुलाई २०७३ रविवार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 19:14 – 21:38
१४ १६ जुलाई २०७३ रविवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 19:13 – 21:37
१५ १ अगस्त २०७३ मंगलवार आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 19:08 – 21:32
१६ १५ अगस्त २०७३ मंगलवार श्रावण शुक्ल पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 19:00 – 21:24
१७ ३० अगस्त २०७३ बुधवार श्रावण कृष्ण पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:49 – 21:13
१८ १३ सितंबर २०७३ बुधवार भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:37 – 21:01
१९ २९ सितंबर २०७३ शुक्रवार भाद्रपद कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:23 – 20:47
२० १३ अक्टूबर २०७३ शुक्रवार आश्विन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:12 – 20:36
२१ २८ अक्टूबर २०७३ शनिवार आश्विन कृष्ण पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 18:02 – 20:26
२२ १२ नवंबर २०७३ रविवार कार्तिक शुक्ल पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 17:56 – 20:20
२३ ११ दिसंबर २०७३ सोमवार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वादशी प्रदोष काळ: 17:57 – 20:21
२४ २६ दिसंबर २०७३ मंगलवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रदोष काळ: 18:04 – 20:28
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भक्ति साहित्य (आरती, चालीसा, स्तोत्र व व्रत कथा)

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शिव आरती (जय शिव ओंकारा)

aarti
जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥...
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📿

श्री शिव चालीसा (सम्पूर्ण ४० चौपाई)

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दोहा: जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥...
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शिव ताण्डव स्तोत्रम् (सम्पूर्ण १५ श्लोक - रावण कृत)

stotram
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवडड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥१॥ ...
संपूर्ण स्तोत्र पढ़ें
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पूजा विधि एवं नियम

सूर्योदय से लेकर शाम की पूजा होने तक व्रत रखें।
अनाज, चावल और सादे नमक का सेवन वर्जित है।
फलाहार में दूध, फल या साबूदाना खिचड़ी (सेंधा नमक के साथ) लें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें और शांत मन से शिव आराधना करें।
ॐ नमः शिवाय॥
— पवित्र मंत्र
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ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

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