मासिक शिवरात्रि (१९६९)
Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार
व्रत का महत्व और जानकारी
मासिक शिवरात्रि प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इसी पावन रात्रि को महादेव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और उन्होंने तांडव नृत्य किया था। इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।
मासिक शिवरात्रि का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है। सबसे महत्वपूर्ण पूजा मध्यरात्रि 'निशीथ काल' में की जाती है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह करना चाहिए।
- शिवलिंग और पूजा के लिए तांबे का लोटा
- बेलपत्र (संभव हो तो 108), धतूरा और शमी पत्र
- अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी) और गंगाजल
- चंदन, विभूति और अष्टगंध
- सफेद सूती जनेऊ (यज्ञोपवीत)
- धूप, अगरबत्ती और आरती के लिए कपूर-दीपक
- नारियल, ताजे फल और भोग के लिए खीर
- सुबह स्नान कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर निराहार या फलाहार रहकर भगवान शिव का ध्यान करें।
- मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा मध्य रात्रि (निशीथ काल) में की जाती है।
- रात को शिवलिंग पर पंचामृत और गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।
- चंदन और विभूति लगाएं, फिर जनेऊ, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं।
- शिव चालीसा का पाठ करें या 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें।
- कपूर से आरती करें और भोग लगाएं।
- रात्रि में जागरण करें और अगले दिन सुबह स्नान-पूजा के बाद व्रत खोलें।
वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय
| # | तारीख / दिनांक | वार | महीना / तिथि | शुभ मुहूर्त |
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| इस वर्ष के लिए कोई तिथि नहीं मिली। | ||||