व्रत और उपवास कैलेंडर
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📍 PUNE
मासिक दुर्गाष्टमी (१५४७)
Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार
📍 Pune
१८.५२०४° N · ७३.८५६७° E
व्रत का महत्व और जानकारी
मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह पवित्र दिन आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। महिषासुर नामक असुर पर मां दुर्गा की विजय के उपलक्ष्य में यह व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से भय का नाश होता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है और घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
✨ व्रत और पूजा का समय
मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत सुबह सूर्योदय से शुरू होकर शाम की आरती तक रहता है। सुबह के समय पूजा और कन्या पूजन करना सर्वोत्तम माना जाता है।
📋 पूजा सामग्री
- मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र
- चौकी और लाल रंग का कपड़ा
- कलश स्थापना के लिए नारियल, आम के पत्ते और लोटा
- रोली, कुमकुम, अक्षत और सिंदूर
- लाल रंग की चुनरी (देवी को चढ़ाने के लिए)
- लाल फूल (विशेषकर गुड़हल या गुलाब)
- धूप, अगरबत्ती और घी का दीपक
- भोग के लिए हलवा, चना और खीर
- आरती के लिए कपूर और घंटी
🪷 पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की स्थापना करें।
- मां को रोली, कुमकुम का तिलक लगाएं, लाल फूल और लाल चुनरी चढ़ाएं।
- कलश स्थापित करें और दीपक व अगरबत्ती जलाएं।
- दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- मां को हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाएं।
- कपूर से आरती करें और आशीर्वाद लें।
- इस दिन कन्या पूजन का भी महत्व है; कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
- शाम को आरती के बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।
वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय
| # | तारीख / दिनांक | वार | महीना / तिथि | शुभ मुहूर्त |
|---|---|---|---|---|
| १ | ९ जनवरी १५४७ | गुरुवार | माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| २ | ७ फरवरी १५४७ | शुक्रवार | माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ३ | ९ मार्च १५४७ | रविवार | चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ४ | ७ अप्रैल १५४७ | सोमवार | चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ५ | ७ मई १५४७ | बुधवार | वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ६ | ५ जून १५४७ | गुरुवार | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ७ | ५ जुलाई १५४७ | शनिवार | आषाढ़ शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ८ | ४ अगस्त १५४७ | सोमवार | श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ९ | २ सितंबर १५४७ | मंगलवार | भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| १० | ३ सितंबर १५४७ | बुधवार | भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| ११ | २ अक्टूबर १५४७ | गुरुवार | आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| १२ | १ नवंबर १५४७ | शनिवार | कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| १३ | ३० नवंबर १५४७ | रविवार | मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
| १४ | ३० दिसंबर १५४७ | मंगलवार | पौष शुक्ल पक्ष अष्टमी | — |
भक्ति साहित्य (आरती, चालीसा, स्तोत्र व व्रत कथा)
दुर्गा आरती (जय अम्बे गौरी)
aartiजय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥...
श्री दुर्गा चालीसा (सम्पूर्ण ४० चौपाई)
chalisaदोहा:
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥...
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