एकादशी व्रत (२३१४)
Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार
व्रत का महत्व और जानकारी
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र उपवास का दिन है, जो प्रत्येक महीने के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई एकादशी देवी ने मुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है, आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रत एकादशी के सूर्योदय से शुरू होता है। सुबह का समय मुख्य पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। व्रत का पारणा द्वादशी के दिन शुभ समय में ही करना चाहिए।
- भगवान विष्णु या भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र
- ताजे पीले फूल (पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय है)
- ताजी तुलसी की पत्तियां (एकादशी के दिन तोड़ना वर्जित है)
- धूप, अगरबत्ती और रोली-चंदन-कुमकुम
- घी का दीपक और कपूर
- पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी)
- ताजे फल और सूखे मेवे
- कलश में शुद्ध जल या गंगाजल
- वेदी पर बिछाने के लिए साफ पीला कपड़ा
- बिना अन्न के तैयार किया गया नैवेद्य
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लेकर भगवान को पंचामृत से अभिषेक कराएं।
- चंदन, हल्दी-कुमकुम और पीले फूल अर्पित करें।
- चरणों में तुलसी पत्र अर्पित करें (तुलसी पत्र एकादशी को न तोड़ें, एक दिन पूर्व ही तोड़ लें)।
- घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं और फल तथा पंचामृत का भोग लगाएं।
- विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
- कपूर से आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन या जागरण करें और अगले दिन द्वादशी को शुभ समय पर पारणा करें।
वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय
| # | तारीख / दिनांक | वार | महीना / तिथि | शुभ मुहूर्त |
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| इस वर्ष के लिए कोई तिथि नहीं मिली। | ||||