Todaycalendar

हिंदी पंचांग 2007

Advertisement
🕉
📿 व्रत और उपवास कैलेंडर 📍 PUNE

एकादशी व्रत (२००७)

Pune में सटीक पंचांग समय के अनुसार

📍 Pune
१८.५२०४° N  ·  ७३.८५६७° E
📖

व्रत का महत्व और जानकारी

एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र उपवास का दिन है, जो प्रत्येक महीने के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुई एकादशी देवी ने मुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है, आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

✨ व्रत और पूजा का समय

व्रत एकादशी के सूर्योदय से शुरू होता है। सुबह का समय मुख्य पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। व्रत का पारणा द्वादशी के दिन शुभ समय में ही करना चाहिए।

📋 पूजा सामग्री
  • भगवान विष्णु या भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र
  • ताजे पीले फूल (पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय है)
  • ताजी तुलसी की पत्तियां (एकादशी के दिन तोड़ना वर्जित है)
  • धूप, अगरबत्ती और रोली-चंदन-कुमकुम
  • घी का दीपक और कपूर
  • पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी)
  • ताजे फल और सूखे मेवे
  • कलश में शुद्ध जल या गंगाजल
  • वेदी पर बिछाने के लिए साफ पीला कपड़ा
  • बिना अन्न के तैयार किया गया नैवेद्य
🪷 पूजा विधि
  1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  3. व्रत का संकल्प लेकर भगवान को पंचामृत से अभिषेक कराएं।
  4. चंदन, हल्दी-कुमकुम और पीले फूल अर्पित करें।
  5. चरणों में तुलसी पत्र अर्पित करें (तुलसी पत्र एकादशी को न तोड़ें, एक दिन पूर्व ही तोड़ लें)।
  6. घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं और फल तथा पंचामृत का भोग लगाएं।
  7. विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  8. कपूर से आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
  9. रात्रि में भजन-कीर्तन या जागरण करें और अगले दिन द्वादशी को शुभ समय पर पारणा करें।
📅

वार्षिक व्रत कैलेंडर तिथियां और समय

# तारीख / दिनांक वार महीना / तिथि शुभ मुहूर्त
१५ जनवरी २००७ सोमवार पौष कृष्ण पक्ष एकादशी
२९ जनवरी २००७ सोमवार माघ शुक्ल पक्ष एकादशी
१३ फरवरी २००७ मंगलवार माघ कृष्ण पक्ष एकादशी
२७ फरवरी २००७ मंगलवार फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी
१५ मार्च २००७ गुरुवार फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी
२९ मार्च २००७ गुरुवार चैत्र शुक्ल पक्ष एकादशी
१४ अप्रैल २००७ शनिवार चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी
२७ अप्रैल २००७ शुक्रवार वैशाख शुक्ल पक्ष एकादशी
१३ मई २००७ रविवार वैशाख कृष्ण पक्ष एकादशी
१० २७ मई २००७ रविवार Adhik Jyeshtha शुक्ल पक्ष एकादशी
११ ११ जून २००७ सोमवार Adhik Jyeshtha कृष्ण पक्ष एकादशी
१२ २६ जून २००७ मंगलवार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी
१३ १० जुलाई २००७ मंगलवार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी
१४ २५ जुलाई २००७ बुधवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी
१५ २६ जुलाई २००७ गुरुवार आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी
१६ ९ अगस्त २००७ गुरुवार आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी
१७ २४ अगस्त २००७ शुक्रवार श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी
१८ ७ सितंबर २००७ शुक्रवार श्रावण कृष्ण पक्ष एकादशी
१९ २३ सितंबर २००७ रविवार भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी
२० ६ अक्टूबर २००७ शनिवार भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी
२१ २२ अक्टूबर २००७ सोमवार आश्विन शुक्ल पक्ष एकादशी
२२ ५ नवंबर २००७ सोमवार आश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी
२३ २१ नवंबर २००७ बुधवार कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी
२४ ५ दिसंबर २००७ बुधवार कार्तिक कृष्ण पक्ष एकादशी
२५ २० दिसंबर २००७ गुरुवार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी
🪷

भक्ति साहित्य (आरती, चालीसा, स्तोत्र व व्रत कथा)

🪔

विष्णु आरती (जय जगदीश हरे)

aarti
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥...
संपूर्ण आरती पढ़ें
📿

श्री विष्णु चालीसा (सम्पूर्ण ४० चौपाई)

chalisa
दोहा: विष्णु सुनिए विनय, सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ, दीजै ज्ञान बताय॥...
संपूर्ण चालीसा पढ़ें
📖

निर्जला एवं सामान्य एकादशी व्रत कथा (सम्पूर्ण पद्म पुराण प्रसङ्ग)

vrat katha
पद्म पुराण एवं महाभारत प्रसङ्ग आधारित सम्पूर्ण एकादशी कथा:\n\nभीमसेन-व्यास संवाद (निर्जला एकादशी महात्म्य):\nमहाभारत काल में पाण्डुपुत्र भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास जी से कहा— 'हे पितामह! मेरे भ्राता युधिष्ठिर, माता कुन्ती, द्रौपदी और अर्जुन आदि सभी महीने की दोनों एकादशियों को उपवास करते हैं और मुझे भी व्रत करने को कहते हैं। किन्तु मेरे उदर में 'वृक' नामक जठराग्नि होने के कारण मैं भूख सहन नहीं कर सकता। क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे बिना भोजन त्यागे मुझे एकादशी का फल मिल सके?'\n\nमहर्षि व्यास ने मुस्कुराकर कहा— 'हे भीमसेन! यदि तुम नरक से बचना चाहते हो और स्वर्गलोक की इच्छा रखते हो, तो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की 'निर्जला एकादशी' का व्रत करो। इस दिन आचमन के जल के अतिरिक्त अन्न और जल की एक बूँद भी ग्रहण नहीं करनी चाहिए। इस एक निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को वर्ष भर की सभी २४ एकादशियों के उपवास का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है।'\n\nएकादशी देवी की उत्पत्ति की कथा:\nसत्ययुग में 'मुर' नामक एक महापराक्रमी दानव ने देवराज इन्द्र को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवगण भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु और मुर दानव के बीच १०,००० वर्षों तक युद्ध चला। युद्ध से थककर भगवान विष्णु बदरिकाश्रम की हेमवती गुफा में विश्राम करने चले गए। जब मुर दानव सोये हुए भगवान पर प्रहार करने आया, तब भगवान के दिव्य शरीर से एक अत्यंत सुन्दरी देवी प्रकट हुई। उस देवी ने अपने एक ही हुंकार और अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार से मुर दानव का वध कर दिया।\n\nभगवान विष्णु ने जागकर देखा और प्रसन्न होकर देवी से कहा— 'हे कल्याणी! तुमने देवताओं के परम शत्रु का वध किया है, इसलिए तुम एकादशी तिथि के नाम से जानी जाओगी। जो मनुष्य तुम्हारी तिथि को उपवास रखकर मेरी पूजा करेगा, वह समस्त पापों से मुक्त होकर बैकुंठ धाम को प्राप्त होगा।'...
संपूर्ण व्रत कथा पढ़ें
🕉️

व्रत प्रकार चुनें

अन्य व्रतों की तिथियां देखने के लिए चुनें:

📍

स्थान बदलें

पंचांग समय आपके स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।

📅

वर्ष बदलें

पूजा विधि एवं नियम

सभी प्रकार के अनाज, चावल, दाल और गेहूं का सेवन वर्जित है।
प्याज, लहसुन और सादे नमक का प्रयोग न करें। केवल सेंधा नमक लें।
केवल दूध, फल, मेवे या साबूदाना का सेवन करें (फलाहार)।
ब्रह्मचर्य का पालन करें, क्रोध न करें और सत्य का पालन करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
— पवित्र मंत्र
Advertisement
🪔
🪔

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।

May all be happy. May all be free from illness.

🪔
🪔
🌸
🌺
🔒

प्रीमियम सामग्री (Premium Content)

वर्ष 2007 लॉक है

इस अनुभाग को देखने के लिए सक्रिय प्रो सदस्यता (Active Pro Subscription) या इस पृष्ठ की खरीद आवश्यक है।

📅 कैलेंडर 🪷 त्योहार 🔮 राशिफल